June 24, 2005

Shiva Tandava Stotra

Writing about web page http://shivdham.org/

.. शिवताण्डवस्तोत्रम्..

.. श्रीगणेशाय नमः ..

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले

गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् |

डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं

चकार चण्ड्ताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् || १||

जटाकटाहसंभ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी-

– विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्धनि |

धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके

किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम || २||

धराधरेन्द्रनंदिनीविलासबन्धुबन्धुर

स्फुरद्दिगन्तसन्ततिप्रमोदमानमानसे |

कृपाकटाक्षधोरणीनिरुद्धदुर्धरापदि

क्वचिद्दिगम्बरे( क्वचिच्चिदंबरे) मनो विनोदमेतु वस्तुनि || ३||

लताभुजङ्गपिङ्गलस्फुरत्फणामणिप्रभा

कदम्बकुङ्कुमद्रवप्रलिप्तदिग्वधूमुखे |

मदान्धसिन्धुरस्फुरत्त्वगुत्तरीयमेदुरे

मनो विनोदमद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि || ४||

सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर

प्रसूनधूलिधोरणी विधूसराङ्घ्रिपीठभूः |
भुजङ्गराजमालया निबद्धजाटजूटक

श्रियै चिराय जायतां चकोरबन्धुशेखरः || ५||

ललाटचत्वरज्वलद्धनञ्जयस्फुलिङ्गभा-

– निपीतपञ्चसायकं नमन्निलिम्पनायकम् |
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं

महाकपालिसम्पदेशिरोजटालमस्तु नः || ६||

करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-

द्धनञ्जयाहुतीकृतप्रचण्डपञ्चसायके |
धराधरेन्द्रनन्दिनीकुचाग्रचित्रपत्रक-

– प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम ||| ७||

नवीनमेघमण्डली निरुद्धदुर्धरस्फुरत्-

कुहूनिशीथिनीतमः प्रबन्धबद्धकन्धरः |
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिन्धुरः

कलानिधानबन्धुरः श्रियं जगद्धुरंधरः || ८||
प्रफुल्लनीलपङ्कजप्रपञ्चकालिमप्रभा-

– वलम्बिकण्ठकन्दलीरुचिप्रबद्धकन्धरम् |
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं

गजच्छिदांधकछिदं तमंतकच्छिदं भजे || ९||
अखर्व( अगर्व) सर्वमङ्गलाकलाकदंबमञ्जरी

रसप्रवाहमाधुरी विजृंभणामधुव्रतम् |
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं

गजान्तकान्धकान्तकं तमन्तकान्तकं भजे || १०||

जयत्वदभ्रविभ्रमभ्रमद्भुजङ्गमश्वस-

– द्विनिर्गमत्क्रमस्फुरत्करालभालहव्यवाट् |
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्गतुङ्गमङ्गल

ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः || ११||
स्पृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजङ्गमौक्तिकस्रजोर्-

– गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः |
तृष्णारविन्दचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः

समप्रवृत्तिकः ( समं प्रवर्तयन्मनः) कदा सदाशिवं भजे || १२||
कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुञ्जकोटरे वसन्

विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरः स्थमञ्जलिं वहन् |
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः

शिवेति मंत्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् || १३||
इदम् हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं

पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेतिसंततम् |
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं

विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिंतनम् || १४||

पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं यः

शंभुपूजनपरं पठति प्रदोषे |
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्रतुरङ्गयुक्तां

लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शंभुः || १५||

इति श्रीरावण- कृतम्
शिव- ताण्डव- स्तोत्रम्

सम्पूर्णम्


- 9 comments by 0 or more people Not publicly viewable

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  1. Chirag

    Greetings,

    This is an awsome strotra. I love it – I have been looking for it – Thank you so much. I wish I can copy and past it in MS Word though. But I have booked marked your site so I can visit it and read this anytime. Thank you again.

    Regards,
    Chirag

    16 Oct 2006, 18:52

  2. kaustubh

    thanks…but not able copy it ….as no t having this font….

    09 Apr 2007, 16:45

  3. mitesh

    you will find this from following link and also you can get the PDF version of same
    http://www.stutimandal.com/gif_siva/siva_tandava_ravana.htm

    Om Nama: Shivay

    09 Jul 2007, 12:48

  4. deepak

    this is the best स्तोत्रम् i’ve ever heard. it rocks me more than any rock music :D

    22 Aug 2007, 03:10

  5. deepak

    Two version of this स्तोत्रम् is available in YouTube:
    1) http://youtube.com/watch?v=McrjgeI-PtI
    2) http://youtube.com/watch?v=5KjfiJlkO58

    With the first video, you can read the स्तोत्रम् .
    The second स्तोत्रम् is much faster and more classic.

    22 Aug 2007, 03:13

  6. vijay kant jha

    can you down load shiv tandav srotram auido

    01 Sep 2007, 08:56

  7. shailendra

    strota really purifies soul

    03 Nov 2007, 13:32

  8. Bhargav

    This is the favorite and most inspiring stothram for me. It invokes the manliness in ourself to rise up and show the great power and courage we have. Ravana is a great Shiva Bhakta and I adore Ravana for that.
    This Stothram depicts the greatness of Ravana…

    10 Dec 2007, 06:40

  9. Yogendra

    Imagine Shiva in Words by this stotra (Thanks to Ravana)

    11 Dec 2007, 13:53


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  • Imagine Shiva in Words by this stotra (Thanks to Ravana) by Yogendra on this entry
  • This is the favorite and most inspiring stothram for me. It invokes the manliness in ourself to rise… by Bhargav on this entry
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